Friday, May 25, 2012

कहना चाहा बहुत कह न पाया कभी


कहना चाहा बहुत कह न पाया कभी 
और फिर चैन से रह न पाया कभी 
 
कुछ मुलाक़ात में आप क्या हो गए
क्यूँ भला फासले सह न पाया कभी 

अलविदा की घड़ी जैसे थम सी गयी 
वक़्त उससे निकल बह न पाया कभी 




PS: The meter of this Gazal is same as that of the famous gazal in the voice of Jagjit ji: "aap ko dekh kar dekhata reh gaya".

6 comments:

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

बहुत खूब सर!


सादर

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

कल 27/05/2012 को आपकी यह पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

sushila said...

बहुत ही खूबसूरत शेर कहे हैं आपने । बधाई !

expression said...

बहुत सुन्दर......
छोटे बहर की सुंदर गज़ल.....

अनु

Onkar said...

sundar sher

chakresh singh said...

शुक्रिया दोस्तों


-ckh-

चल दोबारा ज़िन्दगी से प्यार कर

तू किसी शोख़ का सिंगार कर रख भी दे ये ख़ामोशी उतार कर तीरगी ये पल में टूट जायेगी  चल दोबारा ज़िन्दगी से प्यार कर एक ही नहीं कई शिकायतें ...